लोकमंथन किसी सम्मेलन का नाम नहीं है; यह भारत की संवाद-परंपरा का आधुनिक पुनर्प्रतिष्ठापन है। यह भारत के बौद्धिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विमर्श को एक मंच पर लाने का प्रयास है, जहाँ विभिन्न विचारधाराओं के साथ समन्वय और सह-अस्तित्व के साथ राष्ट्र निर्माण पर विचार-मंथन किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लोकमंथन से जुड़ी आपकी जिज्ञासाओं के उत्तर
यहाँ आपको पंजीकरण, कार्यक्रम, आवास, यात्रा, सहभागिता और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी से जुड़े सामान्य प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे।
सामान्य जानकारी
“प्रश्न ही मंथन की शुरुआत है”
पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है। आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध पंजीकरण फॉर्म भरकर, अपनी आवश्यक जानकारी दर्ज करें और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें।
कार्यक्रम प्रातः 09:00 बजे से सायं 07:30 बजे तक संचालित होगा। इसमें उद्घाटन सत्र, समानांतर विचार गोष्ठियाँ, पुस्तक विमोचन, कला प्रदर्शनी और सायंकालीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ सम्मिलित हैं।
दूर-दराज से आने वाले प्रतिनिधि अपने पंजीकरण के समय आवास का विकल्प चुन सकते हैं। आयोजकों द्वारा चयनित होटलों व अतिथिगृहों में रियायती दरों पर उचित व्यवस्था की गई है।
शोधार्थी एवं विद्वान दिए गए विषयों पर अपना शोध सारांश (Abstract) निर्धारित तिथि तक पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। विशेषज्ञ समिति द्वारा चयन के उपरांत विस्तृत पत्र प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।
शुल्क भुगतान हेतु यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के माध्यम से सुरक्षित भुगतान गेटवे की सुविधा उपलब्ध है।
हाँ, पूरे आयोजन परिसर में 24 घंटे प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा और प्रशिक्षित चिकित्सा दल की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
लोकमंथन 2026 का आयोजन राजस्थान की ऐतिहासिक और गौरवशाली धरा पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की तिथियों, स्थल व सभागारों की विस्तृत जानकारी आधिकारिक पोर्टल एवं सूचना माध्यमों द्वारा शीघ्र ही सार्वजनिक की जाएगी।
पंजीकरण की अंतिम तिथि कार्यक्रम शुरू होने से दो सप्ताह पूर्व तक निर्धारित की गई है। सीटों की सीमित संख्या को देखते हुए यथाशीघ्र पंजीकरण कराने की अनुशंसा की जाती है।
सायंकालीन सांस्कृतिक संध्या में पंजीकृत प्रतिनिधियों के अतिरिक्त स्थानीय नागरिक भी निर्धारित पास एवं व्यवस्था के अंतर्गत सहभागी बन सकते हैं।
कार्यक्रम स्थल राजस्थान के प्रमुख शहर में स्थित है, जो निकटतम हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और अंतरराज्यीय बस अड्डे से सुगम सड़क संपर्क द्वारा जुड़ा हुआ है।
राष्ट्र-निर्माण के इस महायज्ञ में सहयोग के इच्छुक युवा 'स्वयंसेवक पंजीकरण' फॉर्म भरकर व्यवस्था, जनसंपर्क, मीडिया और प्रबंधन दलों में जुड़ सकते हैं।
हाँ, सफल भुगतान के तुरंत बाद डिजिटल रसीद आपके स्क्रीन पर प्रदर्शित होगी और प्रतिलिपि आपके पंजीकृत ईमेल पर भी भेजी जाएगी।
मीडिया प्रतिनिधि 'मीडिया डेस्क' के माध्यम से विशेष प्रेस पास प्राप्त कर सकते हैं। दैनिक प्रेस विज्ञप्तियाँ और आधिकारिक तस्वीरें मीडिया गैलरी में उपलब्ध कराई जाएंगी।
लोकमंथन में देश एवं विदेश के प्रख्यात चिंतक, शिक्षाविद, लेखक, शोधार्थी, कला-साधक, सामाजिक कार्यकर्ता, नीति-निर्माता और भारतीय संस्कृति व राष्ट्र-विमर्श में रुचि रखने वाले सभी प्रबुद्ध नागरिक सहभागिता कर सकते हैं।
सुरक्षा एवं व्यवस्था के दृष्टिकोण से आयोजन स्थल पर केवल पूर्व-पंजीकृत प्रतिनिधियों को ही प्रवेश दिया जाएगा। तत्काल (Spot) पंजीकरण केवल रिक्त स्थान उपलब्ध होने की विशेष दशा में ही अनुमन्य होगा।
लोकमंथन के सभी प्रमुख व्याख्यानों और मुख्य सत्रों का सजीव प्रसारण आधिकारिक यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया हैंडल्स पर उपलब्ध रहेगा।
प्रमुख आवास स्थलों और रेलवे स्टेशनों से आयोजन स्थल तक आने-जाने हेतु निर्धारित समय पर निःशुल्क शटल बस सेवा उपलब्ध रहेगी।
पारंपरिक हस्तशिल्प, स्वदेशी उत्पाद और पुस्तक प्रकाशक अपने स्टॉल आवंटन हेतु 'प्रदर्शनी समन्वय समिति' से पोर्टल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।
आयोजन से 15 दिन पूर्व तक पंजीकरण रद्द कराने पर निर्धारित नियमानुसार न्यूनतम प्रशासनिक शुल्क काटकर शेष राशि 7 कार्य दिवसों में वापस की जाती है।
आप पृष्ठ के नीचे दिए गए 'हमसे संपर्क करें' प्रपत्र के माध्यम से, अथवा हेल्पलाइन नंबर एवं ईमेल पर अपनी जिज्ञासा प्रेषित कर सकते हैं।
इस वर्ष का मुख्य विषय 'संवाद, समन्वय, सह-अस्तित्व और समृद्ध भारत' पर आधारित है। इसके अंतर्गत औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, स्वदेशी ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण से जुड़े विभिन्न आयामों पर गहन विमर्श होगा।
पंजीकरण आवेदन स्वीकृत होने के उपरांत आपके पंजीकृत ईमेल और मोबाइल नंबर पर पुष्टिकरण पत्र और डिजिटल प्रवेश पत्र (QR Code आधारित) प्रेषित किया जाएगा।
लोकमंथन 'प्रज्ञा प्रवाह' एवं विभिन्न राष्ट्रवादी तथा सांस्कृतिक संस्थाओं के सामूहिक सहयोग से आयोजित होने वाला एक स्वतंत्र, समावेशी और वैचारिक महाकुंभ है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विचारकों का स्वागत किया जाता है।
इसका प्रमुख उद्देश्य भारत के विस्मृत विमर्श को पुनर्जागृत करना, भारतीय जीवन-मूल्यों को केंद्र में रखकर राष्ट्र की चुनौतियों का समाधान खोजना और समाज में रचनात्मक व सकारात्मक संवाद की संस्कृति को सुदृढ़ बनाना है।
इस वैचारिक अनुष्ठान में देश के शीर्ष विद्वान, केंद्रीय व प्रांतीय प्रतिनिधि, आध्यात्मिक विभूतियाँ, जनजातीय संस्कृति के संरक्षक, युवा शोधार्थी और देश-विदेश से आए प्रतिनिधि सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
हाँ, सभी पंजीकृत एवं पूरे सत्रों में नियमित उपस्थित रहने वाले प्रतिनिधियों को आयोजन समिति द्वारा आधिकारिक सहभागिता प्रमाण पत्र (Certificate of Participation) प्रदान किया जाता है।
क्या आपका प्रश्न यहाँ नहीं है?
हमारी टीम आपकी सहायता के लिए सदैव उपलब्ध है। आप हमसे सीधे संपर्क कर सकते हैं।
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