मुख्य विषय 2026

हम भारत के लोग
लोकचेतना से विश्वकल्याण की ओर....

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स्थान: जवाहर कला केंद्र, जयपुर, राजस्थान

जयपुर : केवल आयोजन स्थल नहीं,
भारतीय सभ्यता का जीवंत प्रतीक

जयपुर — भारतीय सभ्यता का जीवंत प्रतीक

भारत में स्थान केवल भौगोलिक इकाई नहीं होते; वे संस्कृति, स्मृति और सभ्यता के वाहक होते हैं। जयपुर केवल राजस्थान की राजधानी नहीं, अपितु भारतीय ज्ञान, शिल्प, विज्ञान, लोकजीवन, शौर्य, वीरता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का एक जीवंत प्रतीक है।

मरुभूमि में जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने की लोकबुद्धि, लोकदेवताओं की जन-आस्था, संतों और कवियों की वाणी, हवेलियों और दुर्गों का स्थापत्य, हस्तकलाओं की अद्भुत परंपरा और महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय की वैज्ञानिक दृष्टि — ये सब मिलकर जयपुर को भारतीय लोकबुद्धि का जीवंत विश्वविद्यालय बनाते हैं।

ऐसे नगर में लोकमंथन-2026 का आयोजन केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि अतीत की विरासत और भविष्य की आकांक्षा के मध्य एक सजीव सेतु का निर्माण करेगा।

एक नगर, अनेक आयाम

जयपुर की लोकबुद्धि, भारत और विश्व के लिए प्रेरणा

ज्ञान और विज्ञान

ज्ञान और विज्ञान

सवाई जयसिंह की दूरदर्शी विरासत

महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर को भारतीय स्थापत्य, ज्योतिष, गणित, नगर नियोजन और विज्ञान की दृष्टि से एक आदर्श नगर के रूप में विकसित किया।

प्रकृति और लोकबुद्धि

प्रकृति और लोकबुद्धि

जल संरक्षण की अद्भुत परंपरा

मरुभूमि में जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने की लोकबुद्धि, खड़ीन, जोहड़ और बावड़ियों जैसी परंपरागत जल संरचनाएँ आज भी प्रेरणा देती हैं।

शिल्प और सृजनशीलता

शिल्प और सृजनशीलता

हस्तकलाओं की विश्व प्रसिद्ध परंपरा

बंधेज, ब्लॉक प्रिंट, नीली पॉटरी, पत्थर शिल्प और हस्तकलाएँ जयपुर की सृजनशीलता और लोकजीवन की समृद्ध परंपरा को दर्शाती हैं।

शौर्य और संस्कृति

शौर्य और संस्कृति

दुर्गों, लोकदेवताओं और जीवंत लोकपरंपरा की भूमि

आमेर के दुर्गों से लेकर लोकदेवताओं, संतों, कवियों, लोककलाकारों और जनजातीय समुदायों तक — जयपुर भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है।

विषय की दृष्टि

लोकमंथन 2026 सभ्यतागत संवाद, संस्कृति और ज्ञान का भारत का राष्ट्रीय मंच है। यह विचारकों, विद्वानों, कलाकारों और समाज-शिल्पियों को भारत के समृद्ध भविष्य के लिए एक साथ लाता है।
लोक

लोक

जीवंत परंपराएं
स्मृति

स्मृति

सभ्यतागत स्मृति
मंथन

मंथन

संवाद एवं मंथन
भारत

भारत

राष्ट्रीय पहचान

पंचतत्व : लोक जीवन की आधारशिला

जल / संरक्षण

जल / संरक्षण

(टांका)
भूमि

भूमि

(ओरण / खेजड़ी)
अग्नि

अग्नि

(चूल्हा / धूणी)
वायु

वायु

(संक्रांति की पतंग)
आकाश

आकाश

(सप्तऋषि का खटोला)

लोक से विचार, विचार से आधार

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संवाद एवं विचार सूत्र

लोक दर्शन के प्रमुख आयाम

लोक से विचार, विचार से आधार
मरुभूमि से मेघालय तक – मंथन
आंगन की रेखा – सभ्यता की दिशा
बांधनी के रंग – एकता का इंद्रधनुष
रात में रामदेवड़ा की जागर
रावणहठा का संगीत
अमृतादेवी की कथा (लोकशैली)
बारात का आना – बेटी की विदाई
विस्वावली गायन
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं लोक धारा

जीवंत लोक परंपराओं की झलकियां

रामदेवड़ा की जागर 1
रामदेवड़ा की जागर
रावणहठा का संगीत 2
रावणहठा का संगीत
अमृतादेवी की कथा (लोकशैली) 3
अमृतादेवी की कथा
(लोकशैली)
बारात का आना बेटी की विदाई 4
बारात का आना
बेटी की विदाई
विस्वावली गायन 5
विस्वावली गायन
मरुभूमि से मेघालय तक – मंथन 6
मरुभूमि से मेघालय तक – मंथन

समानांतर सत्रों के प्रस्तावित उप‑विषय

न्याय शास्त्र

  • न्याय की भारतीय दृष्टि: धर्म, लोक न्याय और संविधान
  • न्याय तक सुगम पहुँच: समाज की अपेक्षाएँ
  • लोकतांत्रिक संस्थाएँ और संवैधानिक मूल्य
  • भावी न्यायिक व्यवस्थाओं के लिए भारतीय प्रतिमान

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

  • भारतीय पर्यावरण दृष्टि और लोक व्यवहार
  • जल, वन और जैव विविधता के ह्रास की चुनौतियाँ
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और उभरती तकनीकों के भारतीय समाधान
  • विज्ञान आधारित विश्व में भारतीय योगदान

साहित्य

  • भारतीय लोक कथाएँ और ख्याल परंपराएँ
  • समकालीन स्थानीय भाषा और उसका प्रभाव
  • डिजिटल मंचों और प्रकाशन में भाषा के मानक
  • भारत में साहित्यिक विमर्श का भविष्य

कला एवं संस्कृति

  • लोक संगीत, रंगमंच और प्रदर्शन परंपराएँ
  • लोक कला के माध्यम से सांस्कृतिक निरंतरता
  • कला, समाज और राष्ट्रीय जीवन
  • वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत का सांस्कृतिक योगदान

इतिहास

  • प्रामाणिक इतिहास: पांडुलिपियाँ और अभिलेख
  • वास्तुकला, पुरातत्व और सांस्कृतिक विरासत
  • इतिहास में स्थानीय, जनजातीय और जन स्मृतियाँ
  • इतिहास लेखन के भारतीय प्रतिमान

विचारधारा एवं प्रज्ञा

  • लोक शिक्षा (गुरुकुल) और संवाद
  • भारतीय जन स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ
  • प्रचलित विमर्श बनाम वैकल्पिक दृष्टिकोण
  • भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक योगदान

शिक्षा

  • लोक शिक्षा के भारतीय स्वरूप
  • अनुसंधान और नवाचार में सामाजिक सहभागिता
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीयकरण
  • विश्व कल्याण में भारतीय शिक्षा की भूमिका

हमारी दृश्य भाषा

मंडणा

मांडणा

लोक आंगन की रेखा
फड़ कथा पट

फड़ कथा पट

कथाओं से विचार तक
झरोखा जाली

झरोखा जाली

परंपरा और दृष्टि का संगम
लहरिया & बांधेज

लहरिया एवं बांधेज

ऊर्जा, रंग और एकता
लोकवाद्य

लोकवाद्य

संगीत में संवाद
मरु क्षितिज

मरु क्षितिज

रेति, विस्तार और संभावना