हम भारत के लोग
 लोकचेतना से विश्वकल्याण की ओर....

“संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्”

हम सब एक साथ चलें, एक समान बोलें और हम सबका मन एक जैसा एवं एकमत हो

 ऋग्वेद 10.191.2

4 – 6दिसंबर 2026
जवाहर कला केंद्रजयपुर, राजस्थान
▶लोकमंथन की यात्रा देखें

उल्टी गिनती शुरू

210 दिन
:
15 घंटे
:
42 मिनट
:
18 सेकंड
500+
कार्यक्रम
600+
कलाकार /
शिल्पकार
200+
अतिथि /
वक्ता
Scholars and Artists in Dialogue at Lokmanthan

लोकमंथन : भारतीय सभ्यता के संवाद का समकालीन मंच

लोकमंथन किसी सम्मेलन का नाम नहीं है; यह भारत की संवाद-परंपरा का आधुनिक पुनर्प्रतिष्ठापन है। जब वर्ष 2016 में भारत की हृदयस्थली भोपाल में प्रथम लोकमंथन का आयोजन हुआ, तब उसके केंद्रीय विषय "औपनिवेशिकता से भारतीय मानस की मुक्ति" ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया-क्या राजनीतिक स्वतंत्रता के पश्चात भी हमारा ज्ञान, इतिहास, शिक्षा और बौद्धिक विमर्श औपनिवेशिक दृष्टि से मुक्त हो पाया है? इस प्रश्न ने भारतीय बौद्धिक जगत में एक नई ऊर्जा का संचार किया। लोकमंथन ने यह स्थापित किया कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि वैचारिक स्वराज, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और ज्ञान-परंपरा के पुनर्जागरण से निर्मित होगा। आइए साथ चलें, साथ विचार करें और अपने मनों को एक साझा ध्येय से जोड़ें।

Our Vision Icon

हमारी दृष्टि

सभ्यतागत चेतना में समाहित एक आत्मविश्वासी भारत।

Our Mission Icon

हमारा मिशन

संवाद, सृजन और सहभागिता का राष्ट्रीय मंच निर्मित करना।

Our Objectives Icon

हमारे उद्देश्य

जन-जन को जोड़ना, परंपराओं का संरक्षण और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करना।

Why Lokmanthan Icon

लोकमंथन क्यों

क्योंकि भारत का भविष्य संवाद और सामूहिक मेधा से निर्मित होता है।

लोकमंथन 2026 का मुख्य विषय

हम भारत के लोग लोकचेतना से विश्वकल्याण की ओर....

लोक
जीवंत परंपराएं
स्मृति
सभ्यतागत स्मृति
मंथन
संवाद एवं मंथन

भारत

राष्ट्रीय पहचान

लोकमंथन की विकास यात्रा

लोकमंथन 2024 – भाग्यनगर
2024 भाग्यनगर (हैदराबाद)
विषय

लोकावलोकन

विचार, व्यवहार और व्यवस्था : विचार को समाज, शासन और जीवन के व्यवहार में रूपांतरित करने का संकल्प।

संस्मरण देखें
लोकमंथन 2022 – गुवाहाटी
2022 गुवाहाटी
विषय

भारत की लोक परंपराएँ

लोक परंपराओं के माध्यम से लोकजीवन को भारतीय ज्ञान का जीवंत स्रोत स्वीकार करने का आह्वान।

संस्मरण देखें
लोकमंथन 2018 – राँची
2018 राँची
विषय

भारत बोध

जन गण मन : भारत को उसकी सभ्यतागत चेतना से पुनः परिचित कराने का प्रयास।

संस्मरण देखें
लोकमंथन 2016 – भोपाल
2016 भोपाल
विषय

औपनिवेशिकता से भारतीय मानस की मुक्ति

बौद्धिक स्वराज का उद्घोष।

संस्मरण देखें

प्रमुख वक्ता

प्रेरणादायी विचार

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प्रमुख कलाकार

एकजुट करती परंपराएं

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आगामी आयोजन

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नए आयोजनों की घोषणा जल्द की जाएगी।

मुख्य आकर्षण

हम भारत के लोग

लोकमंथन 2026 के विविध आयामों का अनुभव करें

TALKS

व्याख्यान

प्रमुख विचारक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और कार्यकर्ता अपने ज्ञान और अनुभव साझा करते हैं।

EXHIBITIONS

संवाद

प्रमुख विचारक और विशेषज्ञ सार्थक संवाद करते हैं तथा विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।

FOOD FESTIVAL

शास्त्रार्थ

बौद्धिक विमर्श, तर्क-वितर्क और विचारों के आदान-प्रदान की एक जीवंत परंपरा।

HERITAGE EXPERIENCE

धरोहर

जयपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक स्वागतम का जीवंत अनुभव।

WORKSHOPS & INTERACTIONS

शिल्प/कला

पारंपरिक शिल्प, लोक वाद्ययंत्रों और मौखिक परंपराओं पर व्यावहारिक कार्यशालाएं।

FOLK ARTS & PERFORMANCES

लोक कलाएँ

लोकमंथन पारंपरिक लोक नृत्यों, संगीत और प्रदर्शनों का विविध संगम प्रस्तुत करता है।

लोकमंथन के बारे में प्रबुद्धजनों के विचार

प्रेरणादायी अनुभव और चिरस्थायी विचार।

◆ ◆ ◆ ◆
श्री जे. नंदकुमार

श्री जे. नंदकुमार

आ. भा. संयोजक-प्रज्ञा प्रवाह

“

“संस्कृति ही सांस्कृतिक एकता का आधार है, भले ही भारत में अलग-अलग तरह की परंपराएं, रीति-रिवाज और कई तरह की संस्कृतियां मौजूद हों। 'लोक मंथन' का मकसद भारत के बौद्धिक और सांस्कृतिक पहलुओं के बीच की दूरी को कम करना है।”

”

अनुभूति

लोकमंथन का अनुभव करने वाले विचारकों एवं प्रतिभागियों के विचार।

प्रभाव

सार्थक संवाद और स्थायी प्रभाव को दर्शाने वाली गाथाएं।

सामूहिक गौरव

हमारी संस्कृति, मूल्यों और सामूहिक यात्रा का उत्सव।

भविष्य की दिशा

भावी पीढ़ियों को जुड़ने और योगदान देने के लिए प्रेरित करने वाले विचार।

समाचारों में लोकमंथन

लोकमंथन की गूंज, देश-दुनिया में