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लोकमंथन : भारतीय सभ्यता के संवाद का समकालीन मंच
लोकमंथन किसी सम्मेलन का नाम नहीं है; यह भारत की संवाद-परंपरा का आधुनिक पुनर्प्रतिष्ठापन है। जब वर्ष 2016 में भारत की हृदयस्थली भोपाल में प्रथम लोकमंथन का आयोजन हुआ, तब उसके केंद्रीय विषय "औपनिवेशिकता से भारतीय मानस की मुक्ति" ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया-क्या राजनीतिक स्वतंत्रता के पश्चात भी हमारा ज्ञान, इतिहास, शिक्षा और बौद्धिक विमर्श औपनिवेशिक दृष्टि से मुक्त हो पाया है? इस प्रश्न ने भारतीय बौद्धिक जगत में एक नई ऊर्जा का संचार किया। लोकमंथन ने यह स्थापित किया कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि वैचारिक स्वराज, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और ज्ञान-परंपरा के पुनर्जागरण से निर्मित होगा। आइए साथ चलें, साथ विचार करें और अपने मनों को एक साझा ध्येय से जोड़ें।
हमारी दृष्टि
सभ्यतागत चेतना में समाहित एक आत्मविश्वासी भारत।
हमारा मिशन
संवाद, सृजन और सहभागिता का राष्ट्रीय मंच निर्मित करना।
हमारे उद्देश्य
जन-जन को जोड़ना, परंपराओं का संरक्षण और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करना।
लोकमंथन क्यों
क्योंकि भारत का भविष्य संवाद और सामूहिक मेधा से निर्मित होता है।
लोकमंथन की विकास यात्रा
लोकावलोकन
विचार, व्यवहार और व्यवस्था : विचार को समाज, शासन और जीवन के व्यवहार में रूपांतरित करने का संकल्प।
संस्मरण देखें
भारत की लोक परंपराएँ
लोक परंपराओं के माध्यम से लोकजीवन को भारतीय ज्ञान का जीवंत स्रोत स्वीकार करने का आह्वान।
संस्मरण देखें
भारत बोध
जन गण मन : भारत को उसकी सभ्यतागत चेतना से पुनः परिचित कराने का प्रयास।
संस्मरण देखें
लोकमंथन 2026 के लिए पंजीकरण करें
स्टॉल / प्रदर्शक
अपने उत्पादों का प्रदर्शन करें और हजारों लोगों से जुड़ें।
मुख्य आकर्षण
लोकमंथन 2026 के विविध आयामों का अनुभव करें
व्याख्यान
प्रमुख विचारक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और कार्यकर्ता अपने ज्ञान और अनुभव साझा करते हैं।
संवाद
प्रमुख विचारक और विशेषज्ञ सार्थक संवाद करते हैं तथा विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।
शास्त्रार्थ
बौद्धिक विमर्श, तर्क-वितर्क और विचारों के आदान-प्रदान की एक जीवंत परंपरा।
धरोहर
जयपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक स्वागतम का जीवंत अनुभव।
पारंपरिक शिल्प, लोक वाद्ययंत्रों और मौखिक परंपराओं पर व्यावहारिक कार्यशालाएं।
लोकमंथन पारंपरिक लोक नृत्यों, संगीत और प्रदर्शनों का विविध संगम प्रस्तुत करता है।
लोकमंथन के बारे में प्रबुद्धजनों के विचार
प्रेरणादायी अनुभव और चिरस्थायी विचार।
श्री जे. नंदकुमार
आ. भा. संयोजक-प्रज्ञा प्रवाह
“संस्कृति ही सांस्कृतिक एकता का आधार है, भले ही भारत में अलग-अलग तरह की परंपराएं, रीति-रिवाज और कई तरह की संस्कृतियां मौजूद हों। 'लोक मंथन' का मकसद भारत के बौद्धिक और सांस्कृतिक पहलुओं के बीच की दूरी को कम करना है।”
”अनुभूति
लोकमंथन का अनुभव करने वाले विचारकों एवं प्रतिभागियों के विचार।
प्रभाव
सार्थक संवाद और स्थायी प्रभाव को दर्शाने वाली गाथाएं।
सामूहिक गौरव
हमारी संस्कृति, मूल्यों और सामूहिक यात्रा का उत्सव।
भविष्य की दिशा
भावी पीढ़ियों को जुड़ने और योगदान देने के लिए प्रेरित करने वाले विचार।
समाचारों में लोकमंथन


The Traditional Indian Concept of Development

Lok Security: Reviving India’s Grassroots Protection System

Lok Vidya and Lok Arth-Hidden Insights of Indian Economic Resurgence

Swami Vivekananda Yuva Shakti Mission: Fostering Dialogue, Strength and Prosperity
